करेंट अकाउंट क्या है? What is a Current Account?
यह एक बैंक
खाता होता है
जो मुख्य रूप
से व्यापारियों, कंपनियों,
फर्म और प्रोफेशनल
लोगों के लिए
होता है। इसमें
आप रोजाना होने
वाले बार-बार
के लेन-देन
को आसान बना
सकते हैं। इसमें
आप कितने भी
पैसे जमा कर
सकते हैं और
निकाल सकते हैं,
इसमें कोई निश्चित
सीमा नहीं होती।
इसी कारण से
यह बिज़नेस के
लिए अच्छा माना
जाता है। लेकिन
यह सेविंग अकाउंट
से बहुत अलग
होता है, क्योंकि
इसमें आप कोई
ब्याज नहीं कमा
सकते। हालांकि इसमें
ओवरड्राफ्ट जैसी सुविधा
मिल जाती है,
जिससे आप जरूरत
पड़ने पर अतिरिक्त
राशि निकाल सकते
हैं।
करेंट अकाउंट की क्या-क्या विशेषताएँ होती हैं? What Are the Features of a Current Account?
करेंट अकाउंट न केवल लेन-देन के लिए होता है, बल्कि यह बिज़नेस मैनेजमेंट को व्यवस्थित करने के लिए भी बहुत जरूरी होता है। इसमें होने वाली सबसे बड़ी बात यह है कि लगातार होने वाले बड़े भुगतान में कोई रुकावट नहीं आती और अन्य खर्चों का भुगतान भी समय पर हो जाता है। यह अकाउंट बिज़नेस की आय और खर्च का साफ रिकॉर्ड रखने में मदद करता है, जिससे टैक्स फाइलिंग और अकाउंटिंग में सहायता मिलती है। इसके साथ ही डिजिटल सुविधाएँ जैसे ऑनलाइन ट्रांसफर, ऑटो पेमेंट और क्यूआर पेमेंट बिज़नेस को आधुनिक और तेज बना देती हैं।
करेंट और सेविंग अकाउंट में मुख्य अंतर Main Difference Between Current Account and Saving Account
करेंट अकाउंट – यह मुख्य रूप से व्यापारी, कंपनी और बिज़नेस करने वालों के लिए बनाया गया है। इसमें पैसों का लेन-देन ज्यादा मात्रा में किया जा सकता है।
सेविंग अकाउंट – यह उन सभी के लिए बेहतर माना जाता है जो अपने पैसों को बचाना चाहते हैं, जैसे – नौकरी करने वाले व्यक्ति, छात्र और गृहिणी।
|
आधार |
करेंट अकाउंट |
सेविंग अकाउंट |
|
उद्देश्य |
व्यापार के लिए |
बचत के लिए |
|
ब्याज |
नहीं मिलता |
मिलता है |
|
ट्रांजैक्शन |
अनलिमिटेड |
सीमित |
|
न्यूनतम बैलेंस |
ज्यादा |
कम |
|
ओवरड्राफ्ट |
उपलब्ध |
सामान्यतः नहीं |
ब्याज –
करेंट अकाउंट – इसमें आपको कोई
ब्याज नहीं मिलता
है।
सेविंग
अकाउंट
– इसमें आपको 2% से 7% तक
का ब्याज मिल
जाता है। यह
बैंक के अनुसार
अलग-अलग हो
सकता है।
लेन-देन की सीमा
–
करेंट
अकाउंट
– इसमें अनलिमिटेड ट्रांजैक्शन की
सुविधा मिल जाती
है।
सेविंग
अकाउंट
– इसमें सीमित ट्रांजैक्शन ही
कर सकते हैं।
न्यूनतम बैलेंस –
करेंट
अकाउंट
– इसमें अक्सर अधिक न्यूनतम
बैलेंस रखना पड़ता
है।
सेविंग
अकाउंट
– इसमें कम न्यूनतम
बैलेंस या जीरो
बैलेंस की सुविधा
भी मिलती है।
ओवरड्राफ्टिंग सुविधा
–
करेंट
अकाउंट
– इसमें ओवरड्राफ्टिंग की सुविधा
मिलती है (बैलेंस
से ज्यादा पैसा
निकल जाता है)।
सेविंग
अकाउंट
– सामान्यतः ओवरड्राफ्टिंग की सुविधा
नहीं मिलती।
करेंट अकाउंट के फायदे और नुकसान Advantages and Disadvantages of a Current Account
फायदे –
बिज़नेस
की
प्रोफेशनल
इमेज
बनती
है
–
जब आप बिज़नेस
के नाम पर
करेंट अकाउंट रखते
हैं, तो इससे
ग्राहकों और कंपनियों
में भरोसा बढ़
जाता है और
पेमेंट बिज़नेस के नाम
पर ही आती
है।
लोन
अप्रूवल
में
मदद
–
बैंक आपके ट्रांजैक्शन
हिस्ट्री को देखकर
भविष्य में लेन-देन में
आसानी महसूस करती
है। जब बैंक
आपके टर्नओवर को
देखते हैं, तो
वे ओवरड्राफ्ट के
आधार पर लोन
दे सकते हैं।
कैश
फ्लो
मैनेजमेंट
आसान
–
खर्च और आय
का रिकॉर्ड इससे
रखा जा सकता
है, जिसकी मदद
से आप मुनाफा
और नुकसान को
आसानी से समझ
सकते हैं।
मल्टी यूज़र एक्सेस –
जब बैंक करेंट अकाउंट में अलग-अलग कर्मचारियों को लिमिटेड एक्सेस देने की सुविधा देते हैं, तो इससे अकाउंट सुरक्षित रहता है।
करेंट अकाउंट के नुकसान Disadvantages of a Current Account
Idle Money पर कोई
फायदा
नहीं
–
अगर अकाउंट में
ज्यादा पैसा पड़ा
रहता है, तो
उस पर कोई
ब्याज नहीं मिलता
है। इससे अवसर
लागत बढ़ती है।
ज्यादा
डॉक्यूमेंटेशन
–
फर्म या कंपनी
के नाम से
अकाउंट खोलने पर GST, PAN, रजिस्ट्रेशन
आदि कागजात की
जरूरत होती है।
ओवरड्राफ्टिंग
का
गलत
उपयोग
–
अगर ओवरड्राफ्टिंग सुविधा
का सही से
उपयोग नहीं किया
जाए, तो कर्ज
ज्यादा बढ़ सकता
है।
सर्विस
चार्ज
का
प्रभाव
–
हर बैंक के
नियम अलग होते
हैं।
उदाहरण
–
ICICI Bank में
ट्रांजैक्शन लिमिट पार करने
पर चार्ज लग
सकता है।
सही करेंट अकाउंट कैसे चुनें? How to Choose the Right Current Account
एक
सही करेंट अकाउंट
का चयन करने
के लिए हमें
सबसे पहले अपने
बिज़नेस की जरूरत
को समझना चाहिए।
इसमें हमें पता
होना चाहिए कि
हमारी मासिक ट्रांजैक्शन
कितनी हैं, हम
कैश ज्यादा लेते
हैं या डिजिटल
पेमेंट, और औसत
बैलेंस कितना रखते हैं।
अगर आपकी ट्रांजैक्शन
ज्यादा है, तो
हमें ऐसे अकाउंट
को चुनना चाहिए
जिसमें अनलिमिटेड या ज्यादा
फ्री ट्रांजैक्शन मिलते
हों।
दूसरी
महत्वपूर्ण बात है
– मिनिमम
बैलेंस।
हर बैंक का
नियम अलग होता
है। अगर आप
ज्यादा बैलेंस नहीं रख
सकते हैं, तो
ऐसे बैंक को
चुनना चाहिए जिसमें
कम मिनिमम बैलेंस
प्लान हो, नहीं
तो आप पर
पेनल्टी लग जाती
है।
तीसरी
महत्वपूर्ण बात है
– चार्ज
और
फीस। कैश डिपॉजिट
चार्ज, RTGS, NEFT फीस, चेक
बुक चार्ज और
SMS अलर्ट फीस जरूर
जांचें। कई बार
सस्ते दिखावे वाले
अकाउंट बाद में
महंगे साबित हो
जाते हैं।
चौथी
महत्वपूर्ण बात है
– ओवरड्राफ्टिंग
सुविधा।
अगर आपके बिज़नेस
में कभी-कभी
पैसों की कमी
हो जाती है,
तो ओवरड्राफ्ट सुविधा
वाला अकाउंट चुनना
फायदेमंद हो सकता
है, लेकिन उसकी
ब्याज दर जरूर
जांच लें।
अंत
में डिजिटल सुविधाओं
पर ध्यान दें।
मोबाइल बैंकिंग, नेट बैंकिंग,
पेमेंट और POS मशीन सपोर्ट
आज के समय
में बहुत जरूरी
है।
एक सही
करेंट अकाउंट वही
है जो आपके
बिज़नेस के आकार,
ट्रांजैक्शन और बजट
के अनुसार हो।
खाता खोलने से
पहले सभी नियम
और शर्तें ध्यान
से पढ़ें, तभी
आपको असली फायदा
मिलेगा।

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