आपकी हर महीने सैलरी आने के बाद भी महीने के अंत में बैंक बैलेंस ज़ीरो क्यों हो जाता है? क्या आपने कभी सोचा है कि इतनी मेहनत करने के बाद भी आपके पास पैसे क्यों नहीं टिक पाते? इसके पीछे एक बड़ा कारण है—Assets और Liabilities को गलत तरीके से समझना। अक्सर हम Asset खरीदने की बजाय Liability खरीद लेते हैं, और इसी वजह से हम अमीर बनने के सपने से दूर होते चले जाते हैं। इसलिए Assets और Liabilities को सही तरीके से समझना बहुत ज़रूरी हो जाता है। इसी ब्लॉग के माध्यम से हम आपको Assets बनाम Liabilities की सही और सरल जानकारी देने की कोशिश करेंगे, ताकि आप अपने पैसों को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकें और आर्थिक रूप से मज़बूत बन सकें।
एसेट्स क्या हैं? what is assets ?
Assets वे चीज़ें होती हैं
जिनकी मदद से
हम वर्तमान या
भविष्य में पैसा
कमा सकते हैं।
आसान शब्दों में
कहें तो Assets हमारे
पैसों को बढ़ाने
का काम करती
हैं। इनकी सहायता
से हम आर्थिक
रूप से मज़बूत
बनते हैं और
हमारी Financial Stability बेहतर होती है।
उदाहरण:
FD, Mutual Fund, Share, Bonds और
PPF जैसे निवेश Financial
Assets कहलाते
हैं, क्योंकि ये
समय के साथ
हमें रिटर्न देकर
हमारी आय बढ़ाने
में मदद करते
हैं।
Physical Assets
ज़मीन, सोना और
चाँदी जैसे Assets को
Physical Assets कहा जाता है।
ये आमतौर पर
समय के साथ
बढ़ते चले जाते
हैं। हालांकि, कुछ
Physical Assets ऐसे भी होते
हैं जिनसे Assets बढ़ने
की बजाय धीरे-धीरे कम
होने लगते हैं,
जैसे कुछ वस्तुएँ
जिनकी कीमत समय
के साथ घट
जाती है। जैसे:- कार
की कीमत समय के साथ कम होती चली जाती है।
Ø
Assets के
प्रकार
(Types of Assets):-
Assets को उनके स्वभाव
(nature) और उपयोग
(use) के आधार पर
अलग-अलग भागों
में बाँटा गया
है।
Assets का अर्थ होता
है ऐसी वस्तु
या साधन, जिसकी
आर्थिक
मूल्य होती है
और जो भविष्य
में
हमें
पैसा
कमा
कर
दे
सकती
है, उसे Assets कहा जाता
है।
1. समय अवधि (Time Period) के आधार पर
Ø
Current Assets (चालू
संपत्ति):
ऐसी संपत्तियाँ जो
1 वर्ष
के
भीतर
नकद
में
बदली
जा
सकती
हैं।
उदाहरण:
नकद, बैंक बैलेंस,
एफडी, स्टॉक्स, देनदार
(Debtors)
• Non-Current Assets (गैर-चालू संपत्ति):
वे संपत्तियाँ जो लंबे समय तक उपयोग या निवेश के लिए रखी जाती हैं।
उदाहरण: जमीन, मकान, मशीन, वाहन
2. प्रकृति के आधार पर
• Tangible Assets (मूर्त संपत्ति):
जिन्हें देखा और छुआ जा सकता है।
उदाहरण: घर, जमीन, सोना, मशीन
• Intangible Assets (अमूर्त संपत्ति):
जिन्हें देखा नहीं जा सकता, लेकिन जिनका आर्थिक मूल्य होता है।
उदाहरण: ब्रांड वैल्यू, पेटेंट, कॉपीराइट, गुडविल
3. उपयोग के आधार पर
• Operating Assets (संचालन संपत्ति):
वे संपत्तियाँ जो व्यवसाय के संचालन में सीधे उपयोग होती हैं।
उदाहरण: फैक्ट्री, मशीन, कच्चा माल
• Non-Operating Assets (गैर-संचालन संपत्ति):
वे संपत्तियाँ जो व्यवसाय के लिए आवश्यक नहीं होती हैं।
उदाहरण: अतिरिक्त जमीन, निवेश संपत्ति
4. स्वामित्व के आधार पर
• Personal Assets (व्यक्तिगत संपत्ति):
व्यक्ति की निजी संपत्ति।
उदाहरण: घर, कार, बचत
• Business Assets (व्यावसायिक संपत्ति):
व्यवसाय से जुड़ी हुई संपत्ति।
उदाहरण: ऑफिस, स्टॉक्स, मशीनरी
लायबिलिटी क्या है? what is liability ?
Liability वह होती है जो आपको बार-बार खर्च करने के लिए मजबूर करती है। यह आपकी financial value को कम करती है।
Liability आपकी income को बढ़ाने के बजाय आपके खर्च को बढ़ाती है।
उदाहरण:
EMI पर लिए गए साधन जैसे – बाइक, कार या लग्ज़री आइटम।
जब हम इन्हें खरीदते हैं तो हमें लगता है कि हमने कोई asset खरीदा है, लेकिन समय के साथ बढ़ते खर्च जैसे – EMI, मेंटेनेंस, ईंधन आदि के रूप में होने वाले खर्च आपको आर्थिक रूप से कमजोर करते हैं, इसलिए इन्हें liability कहा जाता है।
Note:
घर को कई बार assets माना जाता है, जब वह आपको कोई income नहीं देता।
आपका खुद का घर भी हमेशा asset नहीं माना जाता, बल्कि कई बार उसे neutral माना जाता है, क्योंकि इसमें मेंटेनेंस, टैक्स और लोन का खर्च लगातार होता रहता है।
जब घर से आपको कुछ income मिलती है, जैसे उसे किराए पर देने से, तब वह assets माना जाता है।
यदि घर से कोई income नहीं आती, तो वह केवल liability ही माना जाता है।
लायबिलिटी दो प्रकार की होती है:- (Two types of liability):-
1. Good
Liability:
जो आपकी income बढ़ाने में मदद करती है, जैसे – education
loan या business loan
2. Bad
Liability:
जिससे आपका खर्च बढ़ता है और कोई return नहीं मिलता, जैसे – high interest personal loan या credit card debt।
देयताओं के प्रकार (Types of Liability):
1. समय के आधार पर
Current Liability (चालू देयता):
वे देयताएँ जो 1 वर्ष के भीतर चुकानी होती हैं।
उदाहरण:
· लेनदार
· अल्पकालिक ऋण (Short Term Loan)
· बकाया वेतन
· कर देय
Non-Current Liability (गैर-चालू देयता):
वे देयताएँ जो 1 वर्ष से अधिक समय में चुकाई जाती हैं।
उदाहरण:
· होम लोन
· कार लोन
· दीर्घकालीन बैंक ऋण
2. प्रकृति के आधार पर
Fixed Liability (निश्चित देयता):
वे
देयताएँ जिनका भुगतान
निश्चित
समय
पर
करना
होता
है।
उदाहरण:
·
दीर्घकालीन
लोन
·
डिबेंचर
Contingent Liability (आकस्मिक देयता):
वे
देयताएँ जो भविष्य
की
किसी
घटना
पर
निर्भर करती हैं।
उदाहरण:
·
कानूनी
मामला
·
गारंटी
· विवादित कर
संपत्ति और देयता में सामान्य गलतियाँ
1. हर महंगी चीज़ को Asset मान लेना
बाइक, कार, iPhone आदि को
asset मान लेना एक
गलती है, क्योंकि
ये asset
नहीं
होते।
समय के साथ
इनकी value
कम
होती
जाती
है, जिससे ये liability बन जाती
हैं।
2. EMI पर ली गई चीज़ को पूरी तरह Asset समझना
यदि आपका घर
EMI पर
है, तो वह
पूरी तरह asset नहीं
होता।
यह हमारी गलती
होती है कि
हम उसे asset समझ
लेते हैं।
जब तक उस
घर पर loan रहता
है, तब तक
वह liability
+ asset होता है।
3. Income को Asset समझ लेना
कभी भी salary को asset नहीं समझना चाहिए, क्योंकि यह कभी भी रुक सकती है।
4. Good Debt और Bad Debt को न समझना
हर loan को बुरा समझना भी बड़ी गलती है और हर loan को सही समझना भी गलती है।
· Good Liability: होम लोन, एजुकेशन लोन
· Bad Liability: क्रेडिट कार्ड, पर्सनल लोन
5. Intangible Assets को नजरअंदाज करना
सिर्फ जमीन और
मकान को asset मान
लेना गलत है।
Skill, brand, knowledge भी asset होते
हैं।
6. Liquidity को न देखना
सारा पैसा जमीन
या FD में निवेश
कर देना एक
गलती है।
हमें emergency
के
लिए
liquid assets रखना
बहुत जरूरी होता
है।
7. Liability का पूरा रिकॉर्ड न रखना
EMI और credit card dues को track न करना
बहुत बड़ी गलती
है,
क्योंकि इससे आपकी
financial value हर साल
घटती
है।
निष्कर्ष: (Conclusion of assets and liability)
Assets और liabilities की सही
समझ होना बहुत
जरूरी है।
सही asset आपको financially
मजबूत बनाते हैं, जबकि
गलत liabilities आपको आर्थिक
रूप
से
कमजोर कर सकती
हैं।
इसलिए निवेश और
कर्ज लेने से
पहले सही योजना
और समझ होना
बेहद आवश्यक है।

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